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News in Hindi: लुधियाना। रेड लेडी अब फल उत्पादकों की तकदीर बदलेगी। जी हां, पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई पपीते की यह नई किस्म अपने गुणों से न सिर्फ प्रदेश के फल उत्पादकों की आर्थिक स्थिति बदलेगी, बल्कि पंजाब को भी पपीता उत्पादन में आत्म निर्भर बनाएगी। इसी उद्देश्य को लेकर पंजाब कृषि विश्वविद्यालय(पीएयू) ने इस किस्म को किसानों के लिए जारी किया है।

क्या है रेड लेडी – 786 :पंजाब कृषि विश्वविद्यालय(पीएयू) की ओर से राज्य में पपीते के उत्पादन को बढ़ाने के लिए पपीते की एक नई संकर किस्म रेड लेडी 786 जारी की गई है, यह मूलरूप से ताइवान की है, लेकिन इस पर तीन वर्ष तक रिसर्च करके पीएयू ने इसे प्रदेश के वातावरण के अनुकूल बनाया है। वर्ष 2010 में पीएयू वैज्ञानिकों ने दिल्ली की एक प्राइवेट सीड कंपनी से रेड लेडी 786 के बीज खरीदे और वर्ष 2011 में फ्रूट साइंस डिपार्टमेंट के सीनियर हार्टिकल्चरिस्ट डॉ.हरमिंदर सिंह ने इस पर शोध शुरू की। इसके पहले साल बीज से पौधे तैयार कर राज्य के विभिन्न जिलों में इन पौधों को लगाया गया और पौधों की विकास व जिंदा रहने की दर पर नजर रखी गई, वहीं क्वॉलिटी वाले पौधों को लगने वाली बीमारियों पर भी स्टडी की गई। करीब तीन साल तक गहन शोध और कुछ फेरबदल करने के बाद इसे किसानों के लिए जारी कर दिया गया।

डॉ.गोसल के मुताबिक पपीता ज्यादातर साउथ इंडिया में लगाया जाता है, क्योंकि उन प्रदेशों में गर्मी ज्यादा है, लेकिन पंजाब में वैसा मौसम नहीं है। इसलिए यहां पर अगर किसान नेट हाउस में इसे लगाए तो बेहतर परिणाम सामने आएंगे।ा किसान चाहे तो इसे ओपन में भी लगा सकते है। डॉ.गोसल ने कहा कि पपीते में एंटीऑक्सीडेंट पोषक तत्व कैरोटीनों, विटामिन सी, विटामिन बी, खनिज में पोटाशियम और मैग्नीशियम व फाइबर सहित कई गुण तत्व हैं, जो कि स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत जरूरी हैं।

पीएयू के डॉयरेक्टर ऑफ रिसर्च डॉ.एसस गोसल ने बताया कि रेड लेडी 786 पपीते की दूसरी किस्मों से बिल्कुल अलग है। इस वैरायटी में नर (मेल) व मादा (फीमेल) के गुण एक ही पौधे में हैं। इससे पौधे से पूरी तरह प्रोडक्शन मिलने की गारंटी होती है, जबकि पपीते की अन्य वैरायटी में नर व मादा अलग-अलग होते हैं और कौन सा पौधा नर है और कौन सा पौधा मादा है, इसकी पहचान कर पाना तब तक संभव नहीं, जब तक पौधे को फूल न लग जाए। उदाहरण देते हुए डॉ.गोसल ने बताया कि अगर कोई किसान पपीते की दूसरी वैरायटी के पांच सौ पौधे लगाता है, तो उनमें से कई बार ढाई सौ पौधे नर व ढाई सौ पौधे मादा के होते थे। मादा पौधों पर तो फल लग जाते हैं, लेकिन नर पर फल न लगने के कारण किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता था, जबकि रेड लेडी 786 के सभी पौधों को फल लगेंगे। वहीं यह किस्म आम पपीते को लगने वाले पपायारिंग स्कॉट वायरस से भी मुक्त है। इससे की पपीता जल्दी खराब नहीं होता।

-पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी की तरफ से विकसित की गई पपीते की नई किस्म रेड लेडी 786।

-पपीते की नई किस्म रेड लेडी-786 नौ महीने में देगी फल।

-पपीता उत्पादन में आत्म निर्भर बनाएगी पंजाब के फल उत्पादकों को।

-पपीते की दूसरी किस्मों से अलग है रेड लेडी।

Source-  Hindi News

खेती की खुराक से बची अर्थव्यवस्था

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Illi Najwa reach Manpreet village

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 Hindi News:: राजीव शर्मा, नई दिल्ली। नौ बरस की उम्र में हॉकी की स्टिक से प्रीत लगाने वाले पंजाबी गबरू मनप्रीत सिंह से मलेशियाई बाला इली नजवा सिद्दीकी भी प्रीत लगा बैठीं। 21 वर्षीय इली रविवार को पहली बार जालंधर जिले में स्थित मनप्रीत के गांव मिट्ठापुर पहुंचीं। यहां उनका भव्य स्वागत किया गया।

मलेशिया में दो साल पहले दोनों के नैन लड़े और फिर बातों व मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया। लॉ की स्टूडेंट इली यहां जूनियर विश्व कप में भारतीय हॉकी टीम की कमान संभाल रहे अपने प्यार का हौसला बढ़ाने आई हैं। मनप्रीत की मां मनजीत कौर कहती हैं, हम बहुत खुश हैं, हमें इली उर्फ सीरत जैसी लड़की मिली। (मनप्रीत के परिवार वालों ने इली का नाम सीरत रखा है।)

वह कहती हैं, वाहेगुरु ने यह जोड़ी बनाई है तो हम इस पर ऐतराज कैसे कर सकते हैं। हालांकि, वह पंजाबी और हिंदी नहीं बोल पाती है लेकिन समझ जाती है। हमें उससे बात करने में कुछ दिक्कत तो हो रही है, लेकिन धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा। हम फरवरी में दोनों की सगाई करेंगे।

सगाई की तारीख इटली से मनप्रीत के भाई के आने के बाद तय की जाएगी। इली को मक्के की रोटी, सरसों का साग और लस्सी खूब भा रही है। विश्व कप देखने के लिए मनप्रीत के पूरे परिवार के साथ इली भी 5 दिसंबर को दिल्ली पहुचेंगी और टूर्नामेंट खत्म होने तक यहीं रहेंगी।

Source- News in Hindi

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