Aamir says, AAP explains Meaning of Swaraj to Delhi

आमिर ने की ‘आप’ की तारीफ, कहा- जनता को समझाया ‘स्वराज’ का मतलब

News in Hindi: मुंबई (शुभा शेंट्टी शाहा)। बदलाव प्रकृति का दस्तूर है और अगर ये बदलाव विकास को गति देने के लिए हो तो जनता इसे दिल से स्वीकार करती है। जी हां, ऐसा ही कुछ दिल्ली की जनता के साथ हुआ है। लोगों ने बदलाव के लिए आवाज उठाई और ‘अरविंद केजरीवाल’ के नाम की लहर पूरी राजधानी में बह गई। अभिनेता आमिर खान ने केजरीवाल के इरादों को बल देते हुए कहा कि उन्होंने लोगों को ‘स्वराज’ यानी आजादी का असली मतलब समझाया है।

आमिर खान ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि केजरीवाल ने दिल्ली में बदलाव की जो आंधी लाई है, उससे लोगों में क्रांति की एक लहर बहती दिखाई दे रही है। लोगों ने इस परिवर्तन को दिल से स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि वे क्या पूरी देश की जनता इस फैसले से खुश है। आमिर ने अपने रियलिटी शो सत्यमेव जयते के संदर्भ में कहा कि पहले जब ये शो शुरू हुआ था, सबको डर लग रहा था कि लोग इसे अपना पाएंगे या नहीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जनता ने इसे पूरी तरह अपने जीवन से जोड़कर देखना शुरू कर दिया।

उन्होंने कहा कि जनता आगे आने लगी। वे इन मुद्दों पर चर्चा करने लगी। उनके खामोश लबों को जैसे जुबान मिल गई। वे रोजाना कोई न कोई सामाजिक समस्या की बातें करने लगे। उनके इस रवैये से ये तो साफ है कि वे अपने पूरे सोशल सिस्टम में बदलाव चाहते हैं। वे कुछ नया चाहते हैं और इसका ही नतीजा है कि आज दिल्ली की सत्ता पर इतने साल से काबिज कांग्रेस सरकार का सफाया हो गया है। जनता ने अपनी सरकार खुद चुनी है

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Kejriwal will use double duplex residence in Delhi

नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का पता शीघ्र ही बदलने जा रहा है। अब वो गाजियाबाद के कौशांबी से दिल्ली के लुटियंस जोन में आकर आम आदमी की तकलीफ को सुनेंगे और दूर करेंगे।

राजनीति से वीआइपी संस्कृति समाप्त करने पर जोर देने वाले मुख्यमंत्री केजरीवाल का नया पता भगवान दास रोड स्थित फ्लैट नंबर-7/6, 7/7 होगा। डीडीए के इस 10 कमरे के सरकारी फ्लैट में तेजी से काम चल रहा है। 9 हजार वर्गफुट जमीन पर बने इस मकान में पांच-पांच कमरे के दो फ्लैट हैं। इन दोनों फ्लैटों की दीवार को तोड़कर एक कर दिया गया है।

यहां छह हजार वर्गफुट में कारपेट एरिया है, जबकि तीन हजार वर्ग फुट में लॉन है। फ्लैट नंबर 7/6 में आप कार्यालय होगा, जहां से मुख्यमंत्री आप का कामकाज देखेंगे। जबकि 7/7 में वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ रहेंगे। अभी केजरीवाल गाजियाबाद के कौशांबी स्थित गिरनार अपार्टमेंट में अपने माता-पिता, पत्‍‌नी व बच्चों के साथ रह रहे हैं।

मालूम हो कि सरकारी अधिकारियों ने केजरीवाल को मुख्यमंत्री आवास की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने इससे इन्कार करते हुए कहा था कि वह सरकारी बंगले में नहीं रहेंगे और न ही सुरक्षा लेंगे।

लेकिन इसके बावजूद उन्हें सरकारी आवास और त्रिस्तरीय उच्च कोटि की सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। केजरीवाल राजनीति में वीआइपी संस्कृति को खत्म करने के हिमायती हैं।

उधर, इस बाबत भाजपा नेता विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल की शुरुआत से ही कथनी और करनी में अंतर रहा है। वह कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं। उनका काम केवल जनता को भ्रमित करना है। यही उन्होंने बिजली और पानी के मुद्दे पर भी किया है। इनकी जल्द ही पोल खुल जाएगी।

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Now red lady will change your foutune

News in Hindi: लुधियाना। रेड लेडी अब फल उत्पादकों की तकदीर बदलेगी। जी हां, पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई पपीते की यह नई किस्म अपने गुणों से न सिर्फ प्रदेश के फल उत्पादकों की आर्थिक स्थिति बदलेगी, बल्कि पंजाब को भी पपीता उत्पादन में आत्म निर्भर बनाएगी। इसी उद्देश्य को लेकर पंजाब कृषि विश्वविद्यालय(पीएयू) ने इस किस्म को किसानों के लिए जारी किया है।

क्या है रेड लेडी – 786 :पंजाब कृषि विश्वविद्यालय(पीएयू) की ओर से राज्य में पपीते के उत्पादन को बढ़ाने के लिए पपीते की एक नई संकर किस्म रेड लेडी 786 जारी की गई है, यह मूलरूप से ताइवान की है, लेकिन इस पर तीन वर्ष तक रिसर्च करके पीएयू ने इसे प्रदेश के वातावरण के अनुकूल बनाया है। वर्ष 2010 में पीएयू वैज्ञानिकों ने दिल्ली की एक प्राइवेट सीड कंपनी से रेड लेडी 786 के बीज खरीदे और वर्ष 2011 में फ्रूट साइंस डिपार्टमेंट के सीनियर हार्टिकल्चरिस्ट डॉ.हरमिंदर सिंह ने इस पर शोध शुरू की। इसके पहले साल बीज से पौधे तैयार कर राज्य के विभिन्न जिलों में इन पौधों को लगाया गया और पौधों की विकास व जिंदा रहने की दर पर नजर रखी गई, वहीं क्वॉलिटी वाले पौधों को लगने वाली बीमारियों पर भी स्टडी की गई। करीब तीन साल तक गहन शोध और कुछ फेरबदल करने के बाद इसे किसानों के लिए जारी कर दिया गया।

डॉ.गोसल के मुताबिक पपीता ज्यादातर साउथ इंडिया में लगाया जाता है, क्योंकि उन प्रदेशों में गर्मी ज्यादा है, लेकिन पंजाब में वैसा मौसम नहीं है। इसलिए यहां पर अगर किसान नेट हाउस में इसे लगाए तो बेहतर परिणाम सामने आएंगे।ा किसान चाहे तो इसे ओपन में भी लगा सकते है। डॉ.गोसल ने कहा कि पपीते में एंटीऑक्सीडेंट पोषक तत्व कैरोटीनों, विटामिन सी, विटामिन बी, खनिज में पोटाशियम और मैग्नीशियम व फाइबर सहित कई गुण तत्व हैं, जो कि स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत जरूरी हैं।

पीएयू के डॉयरेक्टर ऑफ रिसर्च डॉ.एसस गोसल ने बताया कि रेड लेडी 786 पपीते की दूसरी किस्मों से बिल्कुल अलग है। इस वैरायटी में नर (मेल) व मादा (फीमेल) के गुण एक ही पौधे में हैं। इससे पौधे से पूरी तरह प्रोडक्शन मिलने की गारंटी होती है, जबकि पपीते की अन्य वैरायटी में नर व मादा अलग-अलग होते हैं और कौन सा पौधा नर है और कौन सा पौधा मादा है, इसकी पहचान कर पाना तब तक संभव नहीं, जब तक पौधे को फूल न लग जाए। उदाहरण देते हुए डॉ.गोसल ने बताया कि अगर कोई किसान पपीते की दूसरी वैरायटी के पांच सौ पौधे लगाता है, तो उनमें से कई बार ढाई सौ पौधे नर व ढाई सौ पौधे मादा के होते थे। मादा पौधों पर तो फल लग जाते हैं, लेकिन नर पर फल न लगने के कारण किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता था, जबकि रेड लेडी 786 के सभी पौधों को फल लगेंगे। वहीं यह किस्म आम पपीते को लगने वाले पपायारिंग स्कॉट वायरस से भी मुक्त है। इससे की पपीता जल्दी खराब नहीं होता।

-पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी की तरफ से विकसित की गई पपीते की नई किस्म रेड लेडी 786।

-पपीते की नई किस्म रेड लेडी-786 नौ महीने में देगी फल।

-पपीता उत्पादन में आत्म निर्भर बनाएगी पंजाब के फल उत्पादकों को।

-पपीते की दूसरी किस्मों से अलग है रेड लेडी।

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खेती की खुराक से बची अर्थव्यवस्था

Exit poll: bjp leads in four states

exit poll

Hindi News:  नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माने जा रहे चार राज्यों के विधानसभा चुनावों के अंतिम नतीजे जो भी हों, एक्जिट पोल [मतदान बाद सर्वे] में भाजपा की पौ बारह हो गई है। इसके मुताबिक पांच में चार राज्यों में जहां केसरिया लहराएगा वहीं कांग्रेस के तीनों राज्यों में जनता ने बदलाव का संकेत दे दिया है।

इसी रुझान पर रविवार को नतीजे आए तो छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के गढ़ में हैट्रिक बनाते हुए भाजपा दिल्ली में 15 साल बाद कांग्रेस को उखाड़ेगी तो राजस्थान के रेगिस्तान में फिर कमल खिलेगा। कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब यह है कि मिजोरम में भी वह बहुमत से दूर दिख रही है। वहां त्रिशंकु विधानसभा का रुझान है। लोकसभा चुनाव से पूर्व यह रुझान कांग्रेस को डरा सकता है।

पांच राज्यों के चुनाव बुधवार को समाप्त हुए तो अहम संकेत भी छोड़ गए। कम से कम रुझानों ने यह साबित कर दिया कि सामान्यतया चुनाव में अहम न माने जाने वाले महंगाई, भ्रष्टाचार और विकास इस बार तो मुद्दे थे ही, संभवत: आगे भी रहेंगे। इन्हीं मुद्दों पर कांग्रेस को घेर रहे राजग के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और भाजपा को इससे बड़ा आत्मबल मिल सकता है। दरअसल इस क्लीन स्वीप के बाद मोदी का दबदबा तो और बढ़ेगा ही, राजग के विस्तार की राहें भी खुल सकती हैं। इस बात को नकारा नहीं जा सकता है कि इसके बाद कांग्रेस अपने सहयोगियों के बीच घिरे।

ध्यान रहे कि इन चारों राज्यों में मोदी ने इस बार सघन प्रचार किया था। नवंबर में उनका 15 दिन इन्हीं राज्यों में बीता था। राजनैतिक रूप से इन विधानसभा चुनावों को लोकसभा का सेमीफाइनल माना जा रहा था। रुझानों ने फाइनल के लिए उत्साह बड़ा दिया है।

दरअसल यह वे राज्य हैं, जिनसे भाजपा बड़ी आशा लगाए बैठी है। लोकसभा चुनाव में जहां राजस्थान में प्रदर्शन सुधरने की आशा है, वहीं दिल्ली में सातों संसदीय सीट गंवा चुकी पार्टी इस बार इसे पूरी तरह पलटने की कोशिश करेगी।

भाजपा के इस उत्साह का कारण स्पष्ट है। रुझान के अनुसार जनता विकास के लिए छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भाजपा को सराहती दिख रही है। वहीं उसने दिल्ली में विकास के बावजूद कांग्रेस सरकार को नकार दिया। जाहिर तौर पर यह बदलाव उसे सबसे ज्यादा भाएगा। शायद यही उत्साह केंद्र में कांग्रेस की दस साल पुरानी सरकार के खिलाफ लड़ाई में और ज्यादा बल देगा। राजस्थान में यूं तो सरकार बदलने की परंपरा रही है, लेकिन सर्वे में जिस तरह भाजपा के पक्ष में बढ़ोत्तरी दिखाई गई, वह कांग्रेस को परेशान कर सकता है।

दरअसल राजस्थान में कांग्रेस जाट आरक्षण, गुर्जर समर्थन जैसे कई समीकरणों को साधकर आश्वस्त हो रही थी। कई योजनाओं ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लोकप्रिय भी बनाया था।

कांग्रेस के लिए खतरनाक संकेत मिजोरम में भी है। दरअसल यहां कांग्रेस का मुकाबला क्षेत्रीय दलों से है, लेकिन एक्जिट पोल ने कांग्रेस को बहुमत से दो सीट पीछे रखा है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी के लिए सिर्फ भ्रष्टाचार चुनावी मुद्दा था। उसके लिए जनता के समर्थन ने जहां इस मुद्दे को स्थापित किया वहीं महंगाई के खिलाफ भाजपा बिगुल बजाती रही थी।

जाग गए मतदाता

विधानसभा चुनाव के नतीजे जो भी हों, जनता ने यह बता दिया है कि लोकतंत्र अब सचमुच बहुमत से तय होगा। हर साल होते रहे चार पांच चुनावों की कड़ी में यह पहली बार हुआ कि सभी पांचों राज्यों में मतदान फीसद 70 के आस-पास या उसके कहीं आगे रहा। साथ ही यह संकेत भी मिल गया कि चुनावों में व्यक्ति भी अहम होता है। इसके लिए नरेंद्र मोदी के साथ-साथ रमन सिंह, शिवराज सिंह चौहान और अरविंद केजरीवाल को बड़ा कारण माना जा रहा है। चुनाव आयोग की कोशिशों के बीच यह राहत और आश्वासन का विषय है कि सामान्यता वोटिंग से दूर रहने वाला मध्यमवर्ग अब जाग गया है। पिछली बार की अपेक्षा इस बार सभी राज्यों में मतदान प्रतिशत में ऐतिहासिक वृद्धि हुई। दरअसल मतदान बढ़ने को सत्ता परिवर्तन से जोड़ा जाता रहा है।

लेकिन रुझान के अनुसार जनता विकास के लिए भी वोट डालती है। खासकर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में संबंधित मुख्यमंत्री बहुत लोकप्रिय माना जा रहे थे। भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़कर राजनीति में आए केजरीवाल को दिल्ली में बढ़े मतदान का श्रेय दिया जा रहा है। तो मोदी का जादू अब कोई भी नहीं नकार रहा है।

किसको, कितनी सीटें (एक्जिट पोल नतीजे-2013)

दिल्ली (70)

पार्टी एबीपी न्यूज एसी नील्सन टाइम्स नाऊ सी वोटर इंडिया टुडे ओआरजी मार्ग टुडेज चाणक्य सीएनएन

आइबीएन सीएसडीएस 2008 की सीटें

भाजपा 37 29 40 – – 23

कांग्रेस 16 21 20 – – 43

आप 15 16 06 – – –

अन्य 02 04 04 – – 04

मध्यप्रदेश (230)

भाजपा 138 145 138 161 136-146 143

कांग्रेस 80 77 80 62 67-77 71

अन्य 12 08 12 7 7-27 16

राजस्थान (200*)

भाजपा – 130 110 147 126-136 78

कांग्रेस – 48 62 39 49-57 96

अन्य – 22 28 14 7-25 26

छत्तीसगढ़ (90)

भाजपा – 44 53 51 45-55 50

कांग्रेस – 41 33 39 32-40 38

अन्य – 05 04 0 0-5 02

Source- News in Hindi

Reasons for higher poll in Assembly Elections

Asselmbly Election 2013

Hindi News:  नई दिल्ली। मतदान के अपने अधिकार के प्रति लोगों में बढ़ती जागरूकता का ही असर है कि पांचों विधानसभा चुनावों में जबरदस्त चुनाव मतदान हुए। मतदान की इस वृद्धि का असर छह महीने बाद होने वाले लोक सभा चुनाव में भी परिलक्षित होने के आसार हैं। मतदाताओं और मतदान की इस तस्वीर की बदलती प्रवृत्ति और उसके कारणों पर एक नजर :-

दिल्ली :

सीटें-70 मत प्रतिशत

2008- 57.58

2013- 66.00

कारण : नए मतदाताओं और युवाओं की हिस्सेदारी। पहली बार नोटा प्रावधान। चुनाव आयोग, मीडिया और गैरसरकारी संगठनों के जागरुकता कार्यक्रम, सोशल मीडिया का असर।

छत्तीसगढ़ :

सीटें- 90 मत प्रतिशत

2008- 71.06

2013- 77.06

कारण : चुनाव आयोग की प्रभावी पहल। युवाओं, महिलाओं और नए मतदाताओं की बढ़ चढ़कर हिस्सेदारी, सशस्त्र बलों की दमदार मौजूदगी एवं पार्टियों के सार्थक प्रयास।

मध्य प्रदेश :

सीटें- 230 मत प्रतिशत

2008 69.78

2013 72.52

कारण: वोटरों को जागरूक करने वाले सिस्टमेटिक वोटर एजुकेशन और निर्वाचन सहभागी कार्यक्रमों का दिखा असर। हालांकि उम्मीद से थोड़ा कम मतदान हुआ।

मिजोरम :

सीटें-40 मत प्रतिशत

2008 82.00

2013 81.29

कारण : उच्च साक्षरता दर एक बड़ा कारक। चुनावों को त्योहार की तरह लिया गया। कई गैर सरकारी संगठनों की अपील और पहल का मतदाताओं में दिखा सकारात्मक असर।

राजस्थान :

सीटें: 200 मत प्रतिशत

2008 67.15

2013 75.20

कारण : महिलाओं और युवाओं की बड़ी हिस्सेदारी रही। वोट डालने संबंधी चुनाव आयोग के अभियान का उत्साहजनक नतीजा निकला। (मतदान 199 सीटों पर)

Source- News in Hindi

Four quakes shake Delhi

Earthquake in Delhi

Hindi News: नई दिल्ली। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव तथा फरीदाबाद में सोमवार देर रात तीन घंटे के भीतर चार बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। जिससे लोगों के बीच दशहत फैल गई और लोग घरों से निकल कर खुले में आ गए। भूकंप से किसी नुकसान की खबर नहीं है।

पहली बार झटके देर रात करीब। 12 बजकर 41 मिनट पर महसूस किए गए। रियेक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.1 थी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) के अनुसार, भूकंप का केंद्र दिल्ली था।

दूसरी बार रात्रि करीब 1 बजकर 40 मिनट पर 3.3 तीव्रता वाले भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसके बाद दिल्ली एवं एनसीआर में लोग अचानक नींद से जाग गए और घरों से बाहर की ओर दौड़ पड़े। कई लोगों ने ट्विट कर बताया कि अचानक कमरों में रखी मेज-कुर्सियां व अन्य सामान हिलने लगा। इस भूकंप का केंद्र दिल्ली-गुड़गांव सीमा पर था।

भूकंप झटके तीसरी बार 1 बजकर 55 मिनट और चौथी बार 3 बजकर 40 मिनट पर महसूस किए गए। जिनकी तीव्रता रियेक्टर स्केल पर क्रमश: 2.5 और 2.8 थी। रियेक्टर स्केल पर इनकी कम तीव्रता होने के बावजूद भी भूकंप का केंद्र दिल्ली होने की वजह से तेज झटके महसूस किए गए।

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Women don’t need court endorsement for consensual sex: Renuka

Women

Hindi News: नई दिल्ली। बालिग लड़कियां सहमति से यौन संबंध बना सकती हैं और इसके लिए महिलाओं को कोर्ट के अनुमोदन की जरूरत नहीं है। कांग्रेस प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने दिल्ली की एक अदालत के फैसले पर टिप्पणी करते हुए सह बात कही। कोर्ट ने कहा था, ‘कुछ मामलों में सामने आया है कि पहले महिलाएं सहमति से संबंध बनाती हैं और बाद में इसे दुष्कर्म का नाम दे देती हैं।’

कोर्ट ने यह भी कहा था कि लड़कियों को सदाचार और सामाजिक आधार पर भी शादी से पहले संबंध स्थापित नहीं करने चाहिए। चौधरी के मुताबिक, इसमें कुछ हद तक सच्चाई भी हो सकती है कि पहले महिलाएं सहमति से संबंध बनाती हों और बाद में बदल जाती हों, लेकिन यह पूरी तरह से लागू होने वाला सच नहीं है। फिर भी मैं फैसले और जज की टिप्पणी पर कुछ नहीं कह सकती।

मैं सिर्फ इतना कह सकती हूं कि महिलाओं के सामने बड़ी चुनौती है। साथ ही, महिलाओं को सहमति से यौन संबंध बनाने का अधिकार है। हमें 18 वर्ष की आयु के बाद इसके लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है और न ही अदालत के फैसले या अनुमोदन की दरकार है।

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