Jayaprada to fight election on congress ticket from Rampur

News in Hindi: मुरादाबाद [ज्ञानेंद्र त्रिपाठी]। फिल्मी दुनिया से आकर आजम खां के शहर रामपुर की सियासी फिल्म बदलने का माद्दा रखने वाली सांसद जयाप्रदा की तीसरी सियासी फिल्म का ट्रेलर अब दिखने लगा है। कल तक आजम द्वारा नवाबी दौर की तोड़ी गई इमारतों का जो मुद्दा आजम और नवेद के बीच था उसे अब जयाप्रदा ने हथिया लिया है। उनकी नजर नवेद की मां की कांग्रेसी सीट पर भी है, जिनको साइकिल पर सवार होकर दो बार जयाप्रदा मात दे चुकी हैं। अब साइकिल नहीं है। सो, कांग्रेस के हाथ का साथ पा कर नई पारी खेलना चाहती हैं और कांग्रेसी सुर में सुर मिलाने लगी हैं।

रामपुर की संसदीय सीट पर अर्से तक नवाबी खानदान के साथ कांग्रेसी कब्जा रहा है तो विधानसभा की सीट पर आजम का दबदबा। पर, वर्ष 2004 के संसदीय चुनाव में यहां की हवा ही बदल गई। अमर सिंह के साथ फिल्मी दुनिया से जयाप्रदा आईं और आजम के नेतृत्व में चुनाव लड़ नवाबी सीट पर काबिज हो गई।

राजनीति की इस दोतरफा की जमीन पर पहली दफा तीसरे चेहरे का उदय हुआ। यहां पर तीसरी पार्टी भाजपा थी, लेकिन उसमें उतनी धार नहीं। पर, 2009 के संसदीय चुनाव में आजम खां ने जयाप्रदा का विरोध किया, लेकिन सपा ने आजम को ही बाहर कर दिया और जयाप्रदा ने आजम खां के विरोध के बावजूद नूरबानो को लगातार दूसरी बार पराजित कर सीट पर कब्जा जमा लिया।

इस तरह जयाप्रदा ने एक बार आजम के साथ तो दूसरी दफा उनके विरोध के बावजूद अपना राजनीतिक रसूख बनाए रखा, लेकिन दोनों बार सपा साथ थी। अब उनके विरोधी आजम हैं, लेकिन उनके साथ कोई पार्टी नहीं है, क्योंकि सपा ने उन्हें निकाल दिया है। ऐसे में जयाप्रदा ने अपनी नई सियासी फिल्म के लिए बैनर खोजना शुरू कर दिया, जिसका संकेत पिछले दिनों तब मिला जब वह रामपुर आईं और राहुल गांधी का गुणगान कर गईं।

नतीजा यह रहा कि राहुल रैली में आए तो कांग्रेस नेत्री के रूप में जयाप्रदा का बैनर भी लगा। इस पर किसी ने कोई विरोध दर्ज नहीं कराया। हां, यह बात फैलने लगी कि इस बार नूरबानो की जगह जयाप्रदा कांग्रेस से चुनाव लड़ेंगी। इसे बल तब मिला जब लोकसभा चुनाव के लिए मुरादाबाद से कांग्रेस प्रत्याशियों के नाम के पैनल में नूरबानो का नाम भेजा गया, जो रामपुर से लड़ती रही हैं।

बुधवार को रामपुर पहुंची जयाप्रदा ने एक बार फिर खुद इस कयास को पूरा बल दे दिया। उन्होंने घोषणा की कि आजम द्वारा तुड़वाए गए नवाबी दौर के गेट को वह सांसद निधि से बनवाएंगी। अब तक गेट की विधिक व उच्चस्तरीय लड़ाई नूरबानो के बेटे नवेद लड़ते रहे हैं, जो आजम के साथ साथ जयाप्रदा के भी विरोधी रहे हैं। पर, अब इस पूरे मामले को जयाप्रदा भी राष्ट्रपति तक ले जाने व दोषियों को दण्डित कराने की कसम खा रही हैं, जो वैचारिक रूप में सही आजम के विरोधी और आपस में भी सियासी विरोधी नवाब खानदान और जयाप्रदा को एक मंच पर ला दिया है। फिर, जयाप्रदा का यह कहना कि वह रामपुर से ही चुनाव लड़ेंगी और किसी पार्टी से लड़ेंगी, इस बात का साफ संकेत हैं कि सबकुछ ठीक रहा तो जयाप्रदा की तीसरी सियासी फिल्म कांग्रेस के पर्दे पर ही प्रदर्शित होगी, क्योंकि सपा में उनकी राह में आजम रोड़ा हैं तो भाजपा से कोई नजदीकी अभी नहीं दिख रही है।

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Aam adami will rule delhi, declared soon

News in Hindi: नई दिल्ली। दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर चल रही ऊहापोह की स्थिति सोमवार को समाप्त हो गई और आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनाने का फैसला कर लिया। उधर, दिल्ली की कार्यवाहक मुख्यमंत्री व कांग्रेस नेता शीला दीक्षित ने केजरीवाल को बधाई देते हुए कहा कि जनता से जो वादे किए गए हैं वह पूरा हो पाना असंभव है। अगर उन्हें विश्वास है तो वो करें, कांग्रेस उन्हें अपना पूरा सहयोग देगी।

‘आप’ की जनता से रायशुमारी की कवायद पूरी करने के बाद पार्टी की अहम बैठक में लिए गए फैसले की जानकारी देते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि लोगों ने हमें सरकार बनाने के हक में फैसला दिया है, इसलिए हम सरकार बनाएंगे। इसके साथ ही यह संशय भी साफ हो गया कि दल्ली की कुर्सी पर केजरीवाल ही बैठेंगे। इस बाबत वह आज उपराज्यपाल नजीब जंग से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। इस बीच, सूत्रों से पता चला है कि ‘आप’ की सरकार 26 दिसंबर को जंतर-मंतर पर शपथ लेना चाहती है। वहीं, पार्टी ने अपने विधायकों को प्रशिक्षण देने का काम शुरू कर दिया है, जो शाम छह बजे तक चलेगा।

गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था और भाजपा अपनी सहयोगी अकाली दल के साथ 32 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। उपराज्यपाल ने सबसे पहले भाजपा को सरकार बनाने का न्यौता दिया लेकिन उनके इन्कार के बाद 28 सीटें जीतकर दूसरे नंबर पर रही आम आदमी पार्टी को बुलाया गया। इससे पहले ही आठ सीटें जीतने वाली कांग्रेस ने आप को सरकार बनाने के लिए समर्थन बनाने की चिट्ठी उपराज्यपाल को भेज दी। इस प्रकार बहुमत का जादुई आंकड़ा पूरा हो गया। लेकिन ‘आप’ ने कांग्रेस से समर्थन लेकर सरकार बनाने के लिए जनता की राय जानने का फैसला किया और एक सप्ताह में मिले एसएमएस, इंटरनेट पर वोटिंग और 280 सभाओं में आए फैसले के बाद आज ‘आप’ ने सरकार बनाने का फैसला किया।

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Kumar Vishwas will fight against Rahul

Delhi election  : नई दिल्ली। दिल्ली में अपनी जीत से गदगद आम आदमी पार्टी [आप] की नजरें अब देश के बड़े दिग्गजों को चित करने पर टिकी हैं। ‘आप’ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी, भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी से लेकर तमाम बड़े नेताओं के खिलाफ चुनाव मैदान में ताल ठोंककर उतरने को तैयार है।

कुमार विश्वास ने कहा है कि उत्तर प्रदेश का नागरिक होने के नाते मेरी जिम्मेदारी बनती है कि हम परंपरागत राजनीति के खिलाफ लड़ें। राहुल गांधी देश के दर्द को महसूस नहीं करते हैं। जब देश को उनकी जरुरत होती है तो वे विदेश में होते हैं। हमने देखा है कि सभी पार्टियां सबकुछ समझौते के तहत करती हैं। अमेठी में राहुल के खिलाफ कोई भी प्रत्याशी उतारने से कतराता है। सोनिया के खिलाफ समाजवादी पार्टी अपना प्रत्याशी नहीं खड़ा करती है। उसी तरह से कन्नौज से डिंपल यादव के खिलाफ कोई पर्चा ही नहीं दाखिल करता है और वे निर्विरोध चुन ली जाती हैं। हमको इसके खिलाफ लड़ना है। अगर हमारी पार्टी राहुल के खिलाफ चनाव में उतारती है तो हम जरुर चुनाव लड़ेंगे।

विश्वास ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में पार्टी कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक प्रत्येक सीट से प्रत्याशी खड़ा करेगी। आम आदमी पार्टी के विधायक मनीष सिसोदिया ने तो यहां तक घोषणा कर दी कि अमेठी में राहुल गांधी के खिलाफ कुमार विश्वास ही चुनाव लड़ेंगे। दिल्ली में मिली अपार सफलता से उत्साहित पार्टी नेताओं को भरोसा है कि लोकसभा चुनाव में भी जनता कांग्रेस व भाजपा को छोड़कर उसके साथ खड़ी रहेगी।

इससे पहले बुधवार को जंतर-मंतर पर आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने चुने गए सभी विधायकों का परिचय कराया। उन्होंने कहा कि चुनाव नतीजे से स्पष्ट है कि देश का आम आदमी कांग्रेस व भाजपा के शासन से तंग आ चुका है। हमने विकल्प दिया और उक्त दोनों पार्टियों द्वारा सभी तिकड़मबाजी के बाद भी 28 सीटों पर हमारे प्रत्याशी विजयी हुए। यह ईमानदार राजनीति की शुरूआत के संकेत हैं। केजरीवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश से कांग्रेस के कई दिग्गज चुनाव लड़ते हैं इसलिए पार्टी के नेता वहां पर विशेष तैयारी के साथ तैयारी करेंगे।

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Exit poll: bjp leads in four states

exit poll

Hindi News:  नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माने जा रहे चार राज्यों के विधानसभा चुनावों के अंतिम नतीजे जो भी हों, एक्जिट पोल [मतदान बाद सर्वे] में भाजपा की पौ बारह हो गई है। इसके मुताबिक पांच में चार राज्यों में जहां केसरिया लहराएगा वहीं कांग्रेस के तीनों राज्यों में जनता ने बदलाव का संकेत दे दिया है।

इसी रुझान पर रविवार को नतीजे आए तो छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के गढ़ में हैट्रिक बनाते हुए भाजपा दिल्ली में 15 साल बाद कांग्रेस को उखाड़ेगी तो राजस्थान के रेगिस्तान में फिर कमल खिलेगा। कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब यह है कि मिजोरम में भी वह बहुमत से दूर दिख रही है। वहां त्रिशंकु विधानसभा का रुझान है। लोकसभा चुनाव से पूर्व यह रुझान कांग्रेस को डरा सकता है।

पांच राज्यों के चुनाव बुधवार को समाप्त हुए तो अहम संकेत भी छोड़ गए। कम से कम रुझानों ने यह साबित कर दिया कि सामान्यतया चुनाव में अहम न माने जाने वाले महंगाई, भ्रष्टाचार और विकास इस बार तो मुद्दे थे ही, संभवत: आगे भी रहेंगे। इन्हीं मुद्दों पर कांग्रेस को घेर रहे राजग के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और भाजपा को इससे बड़ा आत्मबल मिल सकता है। दरअसल इस क्लीन स्वीप के बाद मोदी का दबदबा तो और बढ़ेगा ही, राजग के विस्तार की राहें भी खुल सकती हैं। इस बात को नकारा नहीं जा सकता है कि इसके बाद कांग्रेस अपने सहयोगियों के बीच घिरे।

ध्यान रहे कि इन चारों राज्यों में मोदी ने इस बार सघन प्रचार किया था। नवंबर में उनका 15 दिन इन्हीं राज्यों में बीता था। राजनैतिक रूप से इन विधानसभा चुनावों को लोकसभा का सेमीफाइनल माना जा रहा था। रुझानों ने फाइनल के लिए उत्साह बड़ा दिया है।

दरअसल यह वे राज्य हैं, जिनसे भाजपा बड़ी आशा लगाए बैठी है। लोकसभा चुनाव में जहां राजस्थान में प्रदर्शन सुधरने की आशा है, वहीं दिल्ली में सातों संसदीय सीट गंवा चुकी पार्टी इस बार इसे पूरी तरह पलटने की कोशिश करेगी।

भाजपा के इस उत्साह का कारण स्पष्ट है। रुझान के अनुसार जनता विकास के लिए छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भाजपा को सराहती दिख रही है। वहीं उसने दिल्ली में विकास के बावजूद कांग्रेस सरकार को नकार दिया। जाहिर तौर पर यह बदलाव उसे सबसे ज्यादा भाएगा। शायद यही उत्साह केंद्र में कांग्रेस की दस साल पुरानी सरकार के खिलाफ लड़ाई में और ज्यादा बल देगा। राजस्थान में यूं तो सरकार बदलने की परंपरा रही है, लेकिन सर्वे में जिस तरह भाजपा के पक्ष में बढ़ोत्तरी दिखाई गई, वह कांग्रेस को परेशान कर सकता है।

दरअसल राजस्थान में कांग्रेस जाट आरक्षण, गुर्जर समर्थन जैसे कई समीकरणों को साधकर आश्वस्त हो रही थी। कई योजनाओं ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लोकप्रिय भी बनाया था।

कांग्रेस के लिए खतरनाक संकेत मिजोरम में भी है। दरअसल यहां कांग्रेस का मुकाबला क्षेत्रीय दलों से है, लेकिन एक्जिट पोल ने कांग्रेस को बहुमत से दो सीट पीछे रखा है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी के लिए सिर्फ भ्रष्टाचार चुनावी मुद्दा था। उसके लिए जनता के समर्थन ने जहां इस मुद्दे को स्थापित किया वहीं महंगाई के खिलाफ भाजपा बिगुल बजाती रही थी।

जाग गए मतदाता

विधानसभा चुनाव के नतीजे जो भी हों, जनता ने यह बता दिया है कि लोकतंत्र अब सचमुच बहुमत से तय होगा। हर साल होते रहे चार पांच चुनावों की कड़ी में यह पहली बार हुआ कि सभी पांचों राज्यों में मतदान फीसद 70 के आस-पास या उसके कहीं आगे रहा। साथ ही यह संकेत भी मिल गया कि चुनावों में व्यक्ति भी अहम होता है। इसके लिए नरेंद्र मोदी के साथ-साथ रमन सिंह, शिवराज सिंह चौहान और अरविंद केजरीवाल को बड़ा कारण माना जा रहा है। चुनाव आयोग की कोशिशों के बीच यह राहत और आश्वासन का विषय है कि सामान्यता वोटिंग से दूर रहने वाला मध्यमवर्ग अब जाग गया है। पिछली बार की अपेक्षा इस बार सभी राज्यों में मतदान प्रतिशत में ऐतिहासिक वृद्धि हुई। दरअसल मतदान बढ़ने को सत्ता परिवर्तन से जोड़ा जाता रहा है।

लेकिन रुझान के अनुसार जनता विकास के लिए भी वोट डालती है। खासकर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में संबंधित मुख्यमंत्री बहुत लोकप्रिय माना जा रहे थे। भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़कर राजनीति में आए केजरीवाल को दिल्ली में बढ़े मतदान का श्रेय दिया जा रहा है। तो मोदी का जादू अब कोई भी नहीं नकार रहा है।

किसको, कितनी सीटें (एक्जिट पोल नतीजे-2013)

दिल्ली (70)

पार्टी एबीपी न्यूज एसी नील्सन टाइम्स नाऊ सी वोटर इंडिया टुडे ओआरजी मार्ग टुडेज चाणक्य सीएनएन

आइबीएन सीएसडीएस 2008 की सीटें

भाजपा 37 29 40 – – 23

कांग्रेस 16 21 20 – – 43

आप 15 16 06 – – –

अन्य 02 04 04 – – 04

मध्यप्रदेश (230)

भाजपा 138 145 138 161 136-146 143

कांग्रेस 80 77 80 62 67-77 71

अन्य 12 08 12 7 7-27 16

राजस्थान (200*)

भाजपा – 130 110 147 126-136 78

कांग्रेस – 48 62 39 49-57 96

अन्य – 22 28 14 7-25 26

छत्तीसगढ़ (90)

भाजपा – 44 53 51 45-55 50

कांग्रेस – 41 33 39 32-40 38

अन्य – 05 04 0 0-5 02

Source- News in Hindi

Voting begins in delhi

delhi election

Hindi News: नई दिल्ली। दिल्ली में विधानसभा की 70 सीटों के लिए बुधवार को तय समय से चार मिनट की देरी से मतदान शुरू हुआ। सुबह ग्यारह बजे तक 17 फीसद मतदान हुआ है। इस दौरान आप, भाजपा व कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी ने अपना वोट डाला।

आज दिल्ली के करीब एक करोड़ उन्नीस लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। दिल्ली में कुल 810 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। कांग्रेस व भाजपा के बीच होने वाली पारंपरिक लड़ाई के बीच ‘आप’ के आने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

सुबह आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, भाजपा के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी डॉ. हर्षवर्धन ने वोट डाला। उसके बाद नई दिल्ली सीट के एक मतदान केंद्र पर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपना वोट डाला। दोनों कुछ देर आम लोगों की तरह वोट डालने के लिए अपनी बारी का इंतजार करती रहीं। बाद में उन्हें पुलिस के जवानों ने अलग से ले जाकर मतदान कराया। यहां भाजपा सांसद मेनका गांधी भी मतदान करने पहुंची, लेकिन उन्हें तवज्जो नहीं मिली और उन्होंने आम मतदाता की तरह ही वोट डाला।

इसी सीट पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी अपना वोट डाला। औरंगजेब रोड स्थिति मतदान केंद्र पर आधे घंटे लाइन में खड़े रहने के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने करीब ग्यारह बजे मतदान किया। यहां 11:45 बजे तक 22 फीसद मतदान हुआ है। अब तक यहां 28 फीसद पुरुषों व 16 फीसद महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है।

दिल्ली चुनाव के मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय देव ने भी अपनी पत्‍‌नी के साथ नई दिल्ली विधानसभा में हनुमान रोड मतदान केंद्र पर मतदान किया। उन्होंने दिल्लीवासियों से अनिवार्य रूप से वोट डालने की अपील की।

इससे पहले, सुबह मतदान शुरू होने के आधे घंटे बाद कुछ स्थानों से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी कि शिकायत मिली। रजोकरी में पंद्रह नंबर बूथ पर एवं मुनीरका के मतदान केंद्र नंबर 127 में मशीन में खराबी आई। वहीं पंडारा रोड स्थित मतदान केंद्र में भी ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायत मिली। कागज फंसने और बैटरी ढीली होने के कारण मशीन को जब्त कर लिया गया। उधर, आदर्श नगर स्टेशन के मतदान केंद्र पर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गड़बड़ी का आरोप लगाया। कार्यकर्ताओं के मुताबिक उन्हें मतदान केंद्र के पास उन्हें यहां टेबल लगाने से मना किया गया।

इस बीच, पूर्वी दिल्ली के मिली खबर के अनुसार यहां के पॉश इलाकों में मतदान प्रतिशत दोपहर 12 बजे तक कम रहा। खासतौर पर निर्माण विहार, प्रीत विहार, लक्ष्मी नगर और डिफेंस इन्क्लेव जैसे इलाकों में मतदान प्रतिशत कम रहा। वहीं अनाधिकृत कॉलोनियों और झुग्गी क्लस्टर का मतदान प्रतिशत ज्यादा रहा। पूर्वी दिल्ली में 12 बजे तक 15 फीसद मतदान रिकॉर्ड किया गया। विश्वास नगर स्थित मतदान केंद्र संख्या 161 में ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायत मिली। इसके चलते यहां से भाजपा प्रत्याशी ओम प्रकाश शर्मा को मतदान के लिए आधा घंटा इंतजार करना पड़ा। पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में मतदान सूची में मतदाताओं के नाम गायब होने की शिकायत मिली। लक्ष्मी नगर विधानसभा क्षेत्र में बनाए गए मॉडल मतदान केंद्र में बुजुर्ग एवं शारीरिक रूप से अक्षम मतदाताओं को काफी सुविधा हो रही है। यहां व्हील चेयर और ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है।

उधर, सबसे हॉट सीट मानी जा रही नई दिल्ली पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यहां मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ अरविंद केजरीवाल और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता चुनाव लड़ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इस बार दिल्ली में भारी मतदान होने की संभावना है। अन्य राज्यों छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और मिजोरम में भी रिकॉर्ड तोड़ वोट पड़े हैं।

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