BJP rises 14 questions on AAP to form the government

News in Hindi: नई दिल्ली। इस बार भाजपा, आम आदमी पार्टी (आप) को कमतर आंकने की भूल नहीं करेगी, बल्कि कांग्रेस के बजाय ‘आप’ पर जमकर हमला करेगी। इसकी शुरुआत करते हुए भाजपा ने बुधवार को आप पर जोरदार हमला बोला और कहा कि आप जनमत संग्रह के नाम पर ढोंग कर रहा है। साथ ही, कांग्रेस और आप के गठबंधन को अनैतिक बताया।

चुनाव परिणाम आने के बाद पहले संवाददाता सम्मेलन में बुधवार को भाजपा विधायक दल के नेता डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि चुनाव परिणाम आए 11 दिन बीत गए हैं, बावजूद इसके दिल्ली की जनता अनिर्णय की स्थिति में है। इसके लिए आप जिम्मेवार है। आप को 28 सीटें देकर जनता ने दूसरी बड़ी पार्टी के तौर पर चुना है तो फिर इसके नेता फिर से जनमत संग्रह का ढोंग क्यों कर रहे हैं? जबकि इस जनमत संग्रह का परिणाम पहले से ही तय है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और ‘आप’ के बीच चुनाव पहले से अप्रत्यक्ष गठबंधन है और आने वाले दिनों में ये दोनों पार्टियां मिलकर सरकार बनाएंगी। बेशक आप विधायक दल के नेता अरविंद केजरीवाल द्वारा पूछे गए 18 सवालों का जवाब भाजपा ने नहीं दिया है, लेकिन इन सवालों के बदले भाजपा ने उल्टे आप से 14 सवाल पूछे हैं।

– आप जनता को जवाब दे कि दिल्ली में सरकार बनाएगी या नहीं?

– कांग्रेस का समर्थन लेगी या नहीं?

– अनिश्चय की स्थिति से दिल्ली में विकास बाधित हो रहा है, इसके लिए आप दोषी है या नहीं?

– आप द्वारा एक ओर कांग्रेस पर आरोप लगाए जा रहे हैं, दूसरी ओर कांग्रेस के समर्थन से सरकार बना रही है। क्या यह नूरा कुश्ती है?

– दोनों पार्टियों में अंदरखाने क्या ‘डील’ हुई है?

– भाजपा स्पष्ट कर चुकी है कि सरकार नहीं बनाएगी तो आप ने भाजपा को पत्र क्यों लिखा?

– आप नेता प्रशांत भूषण ने कश्मीर को भारत से अलग करने का समर्थन किया था। इस पर आप को अपना स्टैंड स्पष्ट करना चाहिए।

– सरकार बनाने को लेकर आप द्वारा ड्रामा क्यों रचा जा रहा है?

– तौकीर रजा को समर्थन को लेकर आप अपना स्टैंड स्पष्ट करे?

– क्या केजरीवाल एंड पार्टी समाजसेवी अन्ना हजारे से ज्यादा बुद्धिमान हैं?

– अन्ना हजारे द्वारा पार्टी न बनाने की सलाह क्यों नहीं मानी?

– आप नेता अमर्यादित व असंसदीय भाषा का प्रयोग क्यों करते हैं?

– क्या अन्ना द्वारा लोकपाल का समर्थन करने पर आप जनता की राय मांगेगी?

– क्या आप का उद्देश्य चुनाव लड़ने के नाम पर केवल चंदा वसूलना नहीं है?

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No president rule in delhi!

Delhi election  : नई दिल्ली। दिल्ली विधान सभा चुनाव में में स्पष्ट जनादेश नहीं मिलने के बाद से यह कयास लगाए जा रहे थे कि दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है या दोबारा चुनाव हो सकते हैं। लेकिन अब इन कयासों पर विराम लग गए हैं। गृह मंत्रालय के सूत्रों से यह पता चला है कि फिलहाल दिल्ली में राष्ट्रपति शासन नहीं लगेगा और सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाएगा। अगर वे सरकार बनाने से इन्कार करते हैं तो उसके बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी ‘आप’ सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।

गौरतलब है कि दिल्ली की 70 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 36 सीटें चाहिए। सबसे बड़े दल के रूप में उभरे भाजपा ने शिरोमणि अकाली दल के साथ मिलकर कुल 32 सीटें जीती हैं। उसे बहुमत के लिए चार और सीटों की दरकार है। आम आदमी पार्टी के पास 28 सीटें हैं, उसे बहुमत के लिए आठ सीटें चाहिए। आठ सीटें जीतने वाली कांग्रेस यदि आम आदमी पार्टी को समर्थन दे दे, तो अरविंद केजरीवाल की अगुवाई में नई सरकार बन सकती है। वहीं केजरीवाल ने साफ कर दिया है कि वह विपक्ष में बैठेंगे। जाहिर तौर पर सरकार गठन को लेकर मामला अभी उलझा हुआ है।

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का मानना है कि परंपरा के अनुसार उपराज्यपाल को सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई भाजपा को सरकार बनाने का निमंत्रण देना चाहिए। यदि पार्टी सरकार बनाने को तैयार होती है, तो उसे सदन में विश्वास मत हासिल करने का मौका दिया जाना चाहिए। यदि भाजपा सरकार बनाने से इन्कार करती है, तो दूसरे सबसे बड़े दल आम आदमी पार्टी को उपराज्यपाल सरकार बनाने के लिए कह सकते हैं। कश्यप ने कहा कि उपराज्यपाल सदन को यह संदेश भी दे सकते हैं कि वह अपने नेता का चयन करे, लेकिन सदन का नेता तभी चुना जा सकता है जब किसी दल को स्पष्ट बहुमत हासिल हो। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हुआ तो उपराज्यपाल राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की सिफारिश कर सकते हैं।

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Winning and losing Factor in assembly election

नमो इफेक्ट

Delhi election  : इसके अनुपात पर मतभेद संभव है, लेकिन चुनावी सूबों के नतीजों में नरेंद्र मोदी इफेक्ट का असर जरूर दिखा। मध्य प्रदेश में 2003 से चली आ रही सत्ता की पारी बचाने में और पड़ोसी राज्य राजस्थान में कांग्रेस से राज छीनने में मोदी की सभाओं का भी असर दिखा। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और भाजपा की जीत का अंतर भले ही सबसे कम रहा हो , लेकिन रमन सरकार के लिए तीसरी पारी जुटाने में भी मोदी असर खारिज नहीं किया जा सकता ।

रमन का रंग

मोदी के बाद रमन सिंह भाजपा के दूसरे ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिनकी अगुआई में भाजपा को सूबे में तीसरी बार सत्ता हासिल हुई । मुकाबला बेहद कड़ा होने और सत्ता विरोधी विपक्षी प्रचार के बावजूद रमन अपना किला बचाने में कामयाब हुए इसमें उनके व्यक्तिगत बेदाग छवि का बड़ा योगदान रहा।

शिवराज फैक्टर

मध्य प्रदेश की सत्ता में भाजपा की हैट्रिक के पीछे बड़ा फैक्टर शिवराज सिंह चौहान की आम आदमी छवि और सूबे में व्यक्तिगत लोकप्रियता भी रहा । शिवराज की अगुआई में भाजपा ने सत्ता विरोधी हवा को नकारने के साथ पिछले चुनाव से भी अधिक सीटें निकालने का करिश्मा कर दिखाया। मप्र वह सूबा है जहां भाजपा के पीएम उम्मीदवार मोदी ने भी सबसे कम सभाएं कीं।

केजरीवाल का करिश्मा

चुनाव प्रचार में अरविंद केजरीवाल अपने रेडियो संदेश में कहते थे दिल्ली में कुछ अद्भुत हो रहा है, आम आदमी पार्टी की जबरदस्त लहर है। सचमुच नतीजे भी अद्भुत हीं रहे। तीन बार से मुख्यमंत्री बनती आ रहीं शीला दीक्षित चुनावी राजनीति के नौसिखिए केजरीवाल के हाथों भारी मतों से हार गई। महज एक साल पुरानी पार्टी दिल्ली विधानसभा की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई।

हार के फैक्टर

बेअसर राहुल

कई चुनावों में सघन प्रचार अभियानों के वाबजूद कांग्रेस का नया चेहरा राहुल गांधी जनता को लुभाने में कामयाब नहीं हो सके । इस कड़वे सच को कांग्रेसी नेता भी अकेले में मानते हैं। छत्तीसगढ़ में राहुल की प्रचार सभाओं में दिखाई पड़ी भीड़ भी स्थानीय स्तर पर भाजपा सरकार के खिलाफ नराजगी के कारणों को मतदाताओं के भरोसे में नहीं बदल पाई। राहुल फार्मूले से राजस्थान और राजस्थान में प्रत्याशी चयन का प्रयोग भी धरा रह गया।

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Aaap leaders meet ends, soniya call meets home

Delhi election : नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली भारी सफलता से गदगद आप नेताओं की ताजा बैठक खत्म हो गई। यह बैठक अरविंद केजरीवाल के घर पर चल रही थी। बैठक समाप्ति के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि हम किसी पार्टी का न तो समर्थन लेंगे और न ही किसी को समर्थन देंगे। अगर दोबारा चुनाव की जरूरत पड़ी तो हम उसके लिए भी तैयार हैं। मनीष ने बताया कि इस मुद्दे पर आप के विधायक दलों की बैठक शाम को 5.30 बजे भी होगी।

यही नहीं, आप ने अरविंद केजरीवाल की पूर्व सहयोगी किरण बेदी का प्रस्ताव भी ठुकरा दिया। किरण बेदी ने सुझाव देते हुए कहा था कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए आप और भाजपा को एक-दूसरे से बात करनी चाहिए, क्योंकि अगर दोबारा चुनाव होता है तो वह जनता के साथ अन्याय होगा। सुशासन ‘आप’ और भाजपा दोनों की जिम्मेदारी है, लेकिन आप ने किरण बेदी के इस प्रस्ताव को मानने से इंकार कर दिया।

गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 28 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा के खात में 32 सीटें आई और कांग्रेस को सिर्फ 8 सीटें ही मिल सकी।

वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस की करारी हार के बाद पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी अपने बड़े नेताओं की आज बैठक बुलाई है। सोनिया गांधी ने यह बैठक विधान सभा चुनाव में मिली करारी हार के कारणों पर चर्चा करने के लिए बुलाई है। इस बैठक में आगे हार के कारणों पर चर्चा के अलावा आगे की रणनीति भी तय की जाएगी।

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See at a glance how many votes won and lost veteran knight

Delhi election  : नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भारी मतों से पराजित किया। वहीं भाजपा के मुख्यमंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कृष्णानगर विधानसभा क्षेत्र से बड़ी जीत हासिल की है। वहीं जनता दल यूनाइटेड के शोएब इकबाल पांचवीं बार जीत हासिल करने में सफल रहे हैं।

नेता-पार्टी-विधानसभा क्षेत्र-मतों से विजयी

ं1. अरविंद केजरीवाल-आप-नई दिल्ली-25864

2. डॉ. हर्षवर्धन-भाजपा-नई दिल्ली-43150

3. मनीष सिसोदिया-आप-पटपड़गंज-11476

4. हारुन यूसुफ- कांग्रेस-बल्लीमरान-8093

5. अरविंदर सिंह लवली-कांग्रेस-गांधीनगर-16961

6. जगदीश मुखी-भाजपा-जनकपुरी-2644

7. साहिब सिंह चौहान-भाजपा-घोंडा-11932

8. प्रवेश साहिब सिंह-भाजपा-महरौली-4564

9. शोएब इकबाल-जदयू-मटिया महल-2891

10. जय किशन-कांग्रेस-सुल्तानपुर माजरा-1112

हारने वाले दस बड़े दिग्गज :-

मुख्यमंत्री शीला दीक्षित तथा विधानसभा अध्यक्ष डॉ.योगानंद शास्त्री के साथ-साथ चार मंत्री भी चुनाव हार गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के भाई तथा उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर आजाद सिंह भी चुनाव नहीं जीत सकें।

नेता-पार्टी-विधानसभा क्षेत्र- कितने मत से पराजित

1. शीला दीक्षित-कांग्रेस- नई दिल्ली-25864 (दूसरे स्थान पर)

2. डॉ. योगानंद शास्त्री-कांग्रेस- महरौली-15987 (तीसरे स्थान पर)

3. अशोक वालिया-कांग्रेस-लक्ष्मीनगर-7752 (दूसरे स्थान पर)

4. किरण वालिया-कांग्रेस-मालवीय नगर- 11758 (तीसरे स्थान पर)

5. रमाकांत गोस्वामी-कांग्रेस-राजेंद्र नगर- 14896 (तीसरे स्थान पर)

6. राजकुमार चौहान-कांग्रेस-मंगोलपुरी- 10585 (दूसरे स्थान पर)

7. चौधरी प्रेम सिंह-कांग्रेस-अंबेडकर नगर- 16486 (तीसरे स्थान पर)

8. हरशरण सिंह बल्ली-कांग्रेस-हरिनगर 15801 (तीसरे स्थान पर)

9. आजाद सिंह-भाजपा-मुंडका-7134 (दूसरे स्थान पर)

10. बरखा शुक्ला सिंह-कांग्रेस-आरके पुरम- 8338 (तीसरे स्थान पर)

राजनीतिज्ञ पुत्रों को करना पड़ा हार का सामना:-

पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय साहिब सिंह वर्मा के पुत्र प्रवेश साहिब सिंह (भाजपा) महरौली

विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की है। जबकि अन्य राजनीतिज्ञ पुत्रों को चुनावी समर में पराजय का सामना करना पड़ा है। राजौरी गार्डन के विधायक दयाचंद चंदीला की पत्नी धनवंती चंदीला भी चुनाव नहीं जीत सकीं।

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