Dilip kumar and vyjayanthimala classic romantic film ganga jamuna

जब ट्रेजडी किंग को आया गुस्सा

News in Hindi: मुबई। दिलीप कुमार तब बेहद कूल और कंपोज्ड इंसान माने जाते थे, लेकिन छठे दशक में कुछ घटनाओं के चलते उनके सब्र का पैमाना छलक गया। स्तंभकार वीर सांघवी भी उनके मुरीद हैं। उनका मानना है कि वे सच्चे और देशभक्त मुस्लिम हैं। यहां उन्हें बेपनाह मुहब्बत और सम्मान मिला। वे लेजेंड हैं। हालांकि चीजें उतनी आसान नहीं थीं। उन्हें भले ही जितनी सफलता मयस्सर हो, पर कभी यह नहीं भूलने दिया गया कि वे पहले एक मुसलमान हैं, फिर कुछ और..।

छठे दशक के मध्य में बतौर निर्माता दिलीप कुमार की ‘गंगा जमुना’ आई थी। सेंसर बोर्ड ने फिल्म से संबंधित बहुत से ऐतराज जता दिए। सेंसर बोर्ड के सदस्यों की सबसे बड़ी आपत्ति दिलीप कुमार के किरदार का ‘हे राम’ कहने को लेकर था। दिलीप कुमार शुरू में तो उस ऐतराज को समझ नहीं पाए, क्योंकि उन्होंने वह संवाद गांधी जी का सोचकर कहा था। उन्होंने सदस्यों से कहा, इसमें दिक्कत क्या है? इस संवाद को आम हिंदू कभी भी बोल सकता है। इस पर एक सदस्य ने यहां तक कह दिया। हां, कोई भी हिंदू बोल सकता है, पर..। पर के बाद कहे गए शब्द से दिलीप कुमार खासे आहत व नाराज हुए। मामला बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के पास गया। उनकी मध्यस्थता से मामला सुलटा। फिल्म सेंसर बोर्ड से बिना किसी तब्दीली के पास हुई, पर दिलीप कुमार के कान में वे शब्द आज भी गूंजते हैं।

इस विवाद से पहले छठे दशक में ही दिलीप कुमार को एक और विवाद का सामना करना पड़ा। उन पर पाकिस्तानी जासूस होने के आरोप तक लगे। हुआ यह था कि उनके घर, महबूब स्टूडियो और बिमल राय के घर में एक लड़का काम कर चुका था। वह पूर्वी पाकिस्तान यानी अब के बांग्लादेश का अवैध अप्रवासी था। वह कोलकाता से मुंबई होते हुए फिर कोलकाता जा पहुंचा। उसे वहां के सिटी मजिस्ट्रेट की बेटी से प्यार हो गया। मजिस्ट्रेट की शिकायत पर उस लड़के को अरेस्ट कर लिया गया। उस लड़के के तार कहां तक जुड़े हुए हैं, उसका पर्दाफाश करने के लिए बंगाल पुलिस ने गृह मंत्रालय से दिलीप कुमार, बिमल राय और महबूब खान के घर रेड डालने की परमिशन ली। आरोपों से चौतरफा घिरे दिलीप कुमार पर शुरुआती महीनों में काफी छींटाकशी हुई, पर बाद में सबूतों के अभाव में उस लड़के की फाइल बंद हो गई और दिलीप कुमार बेदाग साबित हुए।

फिर तीस साल बाद मुंबई धमाकों के मद्देनजर दिलीप कुमार सदा विवादों के घेरे में रहे। उनके बारे में घोर आपत्तिजनक टीका-टिप्पणी भी हुई। मुंबई में 13 सीरियल ब्लास्ट 12 मार्च 1993 में हुए थे। उस वारदात से पहले उसी महीने फिल्मी प्रतिनिधिमंडल के साथ दिलीप कुमार दुबई गए थे। उनके वहां जाने पर कई कट्टरपंथी संगठनों ने ऐतराज जताया था। उससे नाराज दिलीप कुमार ने जवाब भी दिया कि क्या दुबई जाने का एकमात्र मतलब दाउद इब्राहिम कनेक्शन होता है। मैं वहां एक चैरिटी मैच की खातिर गया था। मेरे साथ और भी लोग थे। क्या सभी का कनेक्शन दाउद इब्राहिम से है। मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि लोग क्यों मेरी कटिबद्धता पर शक करते हैं। मेरा नाम, मेरी इज्जत सब दांव पर लग गई थी।

Source- Bollywood News in Hindi

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